प्राचीन भीम गुफा पर रामायण पाठ की पूर्णाहुति, आस्था और संस्कृति का हुआ अनूठा संगम- जननायक समाजसेवी विजय सिंह गौतम की सहभागिता से आयोजन को मिली विशेष गरिमा
महिदपुर (कटन) । नगर से समीप स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की धरोहर प्राचीन भीम गुफा के पावन प्रांगण में आयोजित एक दिवसीय रामायण पाठ का भव्य पूर्णाहुति कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के जननायक एवं प्रख्यात समाजसेवी विजय सिंह गौतम की गरिमामयी सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष गौरव प्रदान किया। कार्यक्रम के आयोजक बंजारा समाज द्वारा पूर्णाहुति के शुभ अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन किया गया, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के लिए महाप्रसादी का भव्य आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाज के वरिष्ठजन, युवा एवं मातृशक्ति ने इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस अवसर पर समाजसेवी विजय सिंह गौतम ने उपस्थित जनसमूह को भीम गुफा के ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह गुफा न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इससे जुड़ी अनेक लोककथाएं, धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक प्रसंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। ग्रामीणों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्षों से यह स्थल साधना, तप और धार्मिक आयोजनों का केंद्र रहा है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन हेतु पहुंचते हैं। कार्यक्रम के दौरान विजय सिंह गौतम ने स्थानीय विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्राम सरपंच से आग्रह किया कि भीम गुफा तक पहुंचने वाले मार्ग की सड़क निर्माण एवं उनके ग्रामीण क्षेत्र में सुविधा हेतु स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के लिए शासन को प्रतिवेदन भेजा जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे स्वयं इस विषय को गंभीरता से लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर सहयोग दिलाने का प्रयास करेंगे, जिससे यह पवित्र स्थल और अधिक सुलभ व सुरक्षित बन सके। ग्रामीणों और समाजजनों ने समाजसेवी विजय सिंह गौतम के इस सकारात्मक प्रयास का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया तथा उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भीम गुफा को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में आयोजक बंजारा समाज द्वारा सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का अनुपम उदाहरण बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन में आस्था और गौरव की अनुभूति भर दी।







