आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले छाते और चश्मे जैसे साधारण उत्पादों के लिए भी देश को बड़े पैमाने पर चीन से आयात करना पड़ रहा है। व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बाजार में बिकने वाले इन उत्पादों का अधिकांश हिस्सा चीन से आता है, जिससे घरेलू विनिर्माण की कमजोर स्थिति उजागर होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते दाम, बड़े पैमाने पर उत्पादन और मजबूत सप्लाई चेन के कारण चीनी उत्पाद भारतीय बाजार पर हावी हैं। वहीं देश में कच्चे माल की लागत, तकनीक की कमी और छोटे उद्योगों को पर्याप्त समर्थन न मिल पाने से घरेलू उत्पादन प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। इसका सीधा असर स्थानीय कारीगरों और एमएसएमई सेक्टर पर पड़ रहा है।
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आर्थिक जानकारों के मुताबिक आत्मनिर्भर बनने के लिए सिर्फ नारे नहीं, बल्कि ठोस नीतियों की जरूरत है। घरेलू उद्योगों को तकनीकी सहयोग, आसान कर्ज, टैक्स में राहत और बाजार तक पहुंच दिलाने से ही हालात बदल सकते हैं। जब तक बुनियादी उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन देश में मजबूत नहीं होगा, तब तक आत्मनिर्भर भारत का सपना अधूरा ही रहेगा।







