स्वर्णगिरी पर्वत पर हुआ मित्र मिलन महोत्सव का आयोजन।
भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रतीक स्वर्णगिरी पर्वत मुखारविंद ग्राम चरणमया चिरमिया में मित्र मिलन महोत्सव का आयोजन दो मित्र विक्रम आंजना, तालोद और रणछोड़ आंजना रामाखेड़ी बड़ोद के द्वारा आयोजित किया गया।
दिन में भगवान श्री स्वर्णगिरिराज जी का दिव्य अभिषेक दोनों मित्रों के द्वारा किया गया। तत्पश्चात संध्याकालीन बेला में मित्र मिलन सभा का आयोजन हुआ जिसमें दोनों साथियों के बचपन से लेकर कर अब तक के लगभग 500 मित्रगण सम्मिलित हुए।
सभी मित्रों ने आपस में मिलकर एक दूसरे के साथ अपने विचार सांझा किए। फिर सभी मित्रों ने आपस में मिलकर अपने हाथों से भोजन बनाया और ग्रहण किया।
इस अवसर पर कवि किशोर पांचाल, महू ने स्वर्णगिरी पर्वत तीर्थ क्षेत्र समिति की ओर से मित्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा की जीवन में मित्र बहुत ही आवश्यक है बिना मित्र के जीवन निरर्थक है।
हम अपने माता-पिता और सगे संबंधियों से जो बात करने में कतराते है वही बात हम अपने मित्र के सामने सहजता से रख सकते हैं। मित्र हमारे सुख और दुख के साथी होते हैं।
एक दूसरे के विचारों का मिलना ही मित्रता का मूल मंत्र है।हमारे मित्र यदि अच्छे होंगे तो हमें भी सम्मान मिलेगा और यदि हमारे मित्र बुरे होंगे तो अपमान हमें भी झेलना पड़ेगा। आज भगवान श्री कृष्ण के साथ सुदामा जी की भी पूजा होती है तो यह सुदामा जी का मित्र चयन को दिखाता है।
ज्ञात हो की यह पर्वत भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का साक्षी है भगवान श्री कृष्ण सांदीपनि आश्रम में जब शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तब गुरु माता के आदेश अनुसार अपने मित्र सुदामा के साथ इसी पर्वत पर लकड़ियां लेने के लिए आए थे। यहां पूर्णतः प्राकृतिक वातावरण और भगवान श्री कृष्ण के प्रिय सैकड़ो कदम के वृक्ष है यहां कई पत्थर ऐसे हैं जिन्हें बजाने पर उनमें से मंदिर के घंटे की तरह ध्वनि उत्पन्न होती है। समिति के सदस्य पवन जी गोयल उज्जैन ने जानकारी देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों के लिए समिति द्वारा यहां पर निःशुल्क सेवा और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।
आभार स्वर्णगिरी पर्वत तीर्थ क्षेत्र समिति ग्राम चरणमया चिरमिया ने माना।







