संस्कारित बच्चे ही समाज और राष्ट्र को सही दिशा देंगे : पं. मधुसूदन दीक्षित
श्रीराम मंदिर कुमावत समाज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
झारड़ा। श्रीराम मंदिर कुमावत समाज द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी 22 अगस्त से 28 अगस्त तक श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा का आयोजन किया जा रहा है। दीक्षित परिवार द्वारा भागवत कथा वाचन की यह परंपरा 117वें वर्ष में पहुंच गई है। कथा के छठे दिवस गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्मलाभ लिया।
भागवताचार्य पं. मधुसूदन दीक्षित ने कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के वृंदावन से मथुरा गमन, कंस वध, माता-पिता को कारागार से मुक्त कराने, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने, उद्धव-गोपी संवाद, रुक्मणी हरण, उषा-अनिरुद्ध विवाह एवं सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। पं. दीक्षित द्वारा स्वयं ढोलक पर ताल देते हुए सरस भजनों की प्रस्तुति से कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो गया।
पं. दीक्षित ने कथा के माध्यम से बालकों में धार्मिक, नैतिक एवं राष्ट्रीय संस्कार विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे संस्कारित होंगे तो घर, गांव, नगर और देश में अराजकता नहीं फैलेगी। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।
कथा समापन के अवसर पर आंचलिक पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष सुनील जैन रामसना ने भागवताचार्य पं. मधुसूदन दीक्षित एवं श्रीराम मंदिर के पुजारी सियाराम दास बैरागी का दुपट्टा एवं पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। वहीं आंचलिक पत्रकार संघ के सहसचिव प्रदीप बैरागी एवं सदस्य संतोष शर्मा ने भी अतिथियों का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पुजारी प्रदीप बैरागी ने बताया कि शुक्रवार को कथा के सप्तम एवं अंतिम दिवस राजा परीक्षित के परमधाम गमन सहित अन्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इसके साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन होगा।







